चंडीगढ़ : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा फिल्मों के लिए सुलभता (एक्सेसिबिलिटी) दिशानिर्देशों को 15 मार्च, 2026 से अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है। जहाँ पूरा उद्योग अब ऑडियो विवरण और सांकेतिक भाषा जैसे मानकों को अपना रहा है, वहीं चंडीगढ़ में निर्मित फिल्म 'रब्ब दी आवाज़' ने इस बदलाव की नींव काफी पहले ही रख दी थी। दिसंबर 2023 में रिलीज हुई यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में सामान्य, ऑडियो विवरण और सांकेतिक भाषा अनुवाद सहित सभी प्रारूपों में सेंसर प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली फिल्म बनी थी।
नियमों से पहले पेश की दूरदर्शिता
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक ओजस्वी शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने उस समय समावेशिता को अपनाया, जब ये सुविधाएं वैकल्पिक थीं। फिल्म में न केवल तकनीक का ध्यान रखा गया, बल्कि मुख्य भूमिका (शिव कुमार शर्मा) सहित कई सहायक भूमिकाओं में दृष्टिबाधित व्यक्तियों और डेफ (बधिर) साइनर्स को मौका दिया गया। सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज्म से प्रभावित कलाकारों ने भी इसमें अभिनय कर एक नया वैश्विक मानक तय किया।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
फिल्म के गहरे प्रभाव को देखते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अगस्त 2024 में निर्देशक ओजस्वी शर्मा को अन्य निर्माताओं के मार्गदर्शन के लिए 'रिसोर्स पर्सन' के रूप में आमंत्रित किया था। इसके अलावा, 15 मई 2025 को नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूनेस्को द्वारा आयोजित 20वें 'वी केयर फिल्म फेस्टिवल' में इसे विशेष जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
275 से अधिक मानद स्क्रीनिंग
व्यावसायिक लाभ से परे, इस फिल्म की भारत के 15 राज्यों और अमेरिका, ब्रिटेन, बांग्लादेश व नेपाल जैसे देशों के फिल्म समारोहों में सराहना हुई है। देश भर के शैक्षणिक संस्थानों और वंचित समुदायों के लिए अब तक 275 से अधिक निशुल्क (कॉम्प्लिमेंट्री) स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं। वर्तमान में यह फिल्म 'RFE TV - Rolling Frames Entertainment' के यूट्यूब चैनल पर तीनों सुलभ प्रारूपों में उपलब्ध है।