चंडीगढ़. (प्रोसन बर्मन) चंडीगढ़ ट्राइसिटी की गीतांजलि अरोड़ा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता 'मिसेज़ इंटरनेशनल ग्लोबल 2026' में उन्होंने फर्स्ट रनर-अप का खिताब अपने नाम किया है। इसके साथ ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के लिए उन्हें ‘क्वीन ऑफ फिलैंथ्रॉपी’ के विशेष सम्मान से भी नवाजा गया।
प्रतियोगिता से लौटने के बाद चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गीतांजलि अरोड़ा ने अपनी इस यात्रा को साझा किया। उन्होंने बताया कि मिस इंडिया बनना उनका बचपन का सपना था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उस दौर में यह पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि लगन और मेहनत से किसी भी उम्र में सपनों को साकार किया जा सकता है।
मूल रूप से जालंधर की रहने वाली और पिछले 11 वर्षों से ट्राइसिटी में रह रहीं गीतांजलि एक 9 वर्षीय बच्चे की मां हैं तथा विगत 12 वर्षों से पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने ‘डायडेम मिसेज़ इंडिया लेगेसी एलीट 2025’ का खिताब जीता था, जिससे उनके लिए अंतरराष्ट्रीय मंच के द्वार खुले। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पति सुमित मलिक (आईटी पेशेवर) के निरंतर सहयोग और नेशनल डायरेक्टर अमीषा चौधरी के कुशल मार्गदर्शन को दिया।
25 किलो की पोशाक में दिखाई भारतीय संस्कृति की झलक
प्रतियोगिता के दौरान पर्सनल इंटरव्यू, टैलेंट और इवनिंग गाउन राउंड के साथ-साथ नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। गीतांजलि ने भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों पर आधारित 25 किलोग्राम से अधिक वजनी विशेष पोशाक पहनकर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत किया। बैंकिंग और मॉडलिंग के अलावा वह दो बार ‘बेस्ट मॉम ब्लॉगर’ का पुरस्कार जीत चुकी हैं और मासिक धर्म स्वच्छता, बाल शिक्षा, वित्तीय साक्षरता व पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।