न्यू चंडीगढ़, होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), न्यू चंडीगढ़ की ‘कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक’ में जांचे गए उत्तर भारत के कैंसर-प्रभावित 1,000 परिवारों में से लगभग 30% परिवारों में ऐसे जेनेटिक्स बदलाव पाए गए हैं, जो वंशानुगत कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं। जनवरी 2025 में शुरू की गई अस्पताल की समर्पित कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक ने अब तक 1,000 से अधिक उत्तर भारतीय परिवारों का मूल्यांकन और परामर्श किया है। इसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों की पहचान करना है, जिन्हें लक्षण दिखाई देने से पहले ही वंशानुगत कैंसर का जोखिम हो सकता है। क्लिनिक मरीजों और उनके परिवारों को कैंसर की शीघ्र पहचान, रोकथाम और व्यक्तिगत उपचार के संबंध में मार्गदर्शन भी प्रदान करती है। HBCH&RC पंजाब, परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित टाटा मेमोरियल सेंटर की एक इकाई है।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, परामर्श प्राप्त करने वाले 1,000 परिवारों में से अब तक 912 कैंसर-प्रभावित प्राथमिक मरीजों (इंडेक्स पेशेंट्स) की जेनेटिक्स जांच की जा चुकी है। ये वे मरीज हैं जिनके माध्यम से किसी परिवार में संभावित वंशानुगत बीमारी की पहचान के लिए क्लिनिक का ध्यान आकर्षित होता है। जांच में लगभग 30% की दर से आनुवंशिक बदलावों का पता चला है। आनुवंशिक उत्परिवर्तन (जेनेटिक म्यूटेशन) से आशय आनुवंशिक कोड में ऐसे बदलाव से है, जो वंशानुगत कैंसर के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।
अस्पताल के आनुवंशिक विशेषज्ञों के अनुसार, आनुवंशिक बदलावों में पाए गए लगभग 95% स्तन और डिम्बग्रंथि कैंसर से संबंधित थे। इसके अतिरिक्त, जोखिम की आशंका वाले 132 रक्त-संबंधियों, जिनमें भाई-बहन, माता-पिता और बच्चे शामिल हैं, की भी जांच की गई। इससे परिवार-विशिष्ट वंशानुगत कैंसर जोखिम की पहचान करने तथा शीघ्र पहचान, निवारक देखभाल और समय पर फॉलो-अप की योजना बनाने में सहायता मिली।
अस्पताल के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने कहा, “आनुवंशिक जांच आमतौर पर एक साधारण रक्त परीक्षण के माध्यम से की जाती है। इसमें चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार 26 से 84 जीनों की जांच की जाती है। इनके परिणामों से उपचार करने वाले कैंसर विशेषज्ञ यह आकलन कर सकते हैं कि मरीज में ऐसा वंशानुगत आनुवंशिक बदलाव मौजूद है या नहीं, जो कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। यह जानकारी व्यक्तिगत उपचार संबंधी निर्णय लेने, अधिक निगरानी, निवारक उपायों और आवश्यकता होने पर जोखिम कम करने के उद्देश्य से सर्जरी की योजना बनाने में सहायक हो सकती है। इससे उन परिजनों की पहचान करने में भी मदद मिलती है, जिन्हें आनुवंशिक जांच और नियमित स्क्रीनिंग से लाभ हो सकता है।”
यह क्लिनिक जेनेटिक काउंसलर हाशिमे इस्माइल, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. प्रग्यात ठाकुर तथा डॉ. सीमा गुलिया, मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख देखरेख में संचालित की जा रही है।
डॉ. गुलिया ने कहा, “यदि परिवार के कई सदस्यों को कैंसर हुआ हो, विशेषकर एक ही प्रकार का या आपस में संबंधित प्रकार का कैंसर, अथवा किसी व्यक्ति में असामान्य रूप से कम उम्र में कैंसर विकसित हो जाए, तो उसे आनुवंशिक परामर्श लेने पर विचार करना चाहिए। परिवार में कैंसर का इतिहास न होने पर भी वंशानुगत या आनुवंशिक कैंसर की आशंका हो सकती है। ऐसा तब हो सकता है, जब किसी व्यक्ति को उस विशेष कैंसर के लिए सामान्यतः अपेक्षित उम्र से काफी कम उम्र में कैंसर हो जाए; दोनों स्तनों जैसे युग्मित अंगों में कैंसर विकसित हो; अलग-अलग अंगों में एक से अधिक प्राथमिक कैंसर हों; या वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम के संकेत दिखाई दें। ऐसे संकेतों में पॉलीप्स, सिस्ट, मटर के दाने के आकार की छोटी गांठें या त्वचा अथवा आंखों पर असामान्य रंजित धब्बे शामिल हो सकते हैं। मरीज के चिकित्सकीय और पारिवारिक इतिहास के आधार पर स्तन, डिम्बग्रंथि, जठरांत्र संबंधी, प्रोस्टेट तथा अन्य कैंसरों के कुछ मरीजों के लिए आनुवंशिक परामर्श उपयोगी हो सकता है।”
डॉ. गुलिया ने आगे बताया कि HBCH&RC पंजाब ने अपने संगरूर केंद्र में भी कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक शुरू कर दी है और अस्पताल में ही आनुवंशिक जांच की सुविधा स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जांच के लिए नमूने टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई भेजे जाते हैं।