नई दिल्ली, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) क्षेत्र के विकास के लिए गोबरधन योजना शुरू की। केंद्रीय क्षेत्र की इस योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक 10 साल चलेगी। इसका लक्ष्य घरेलू सीबीजी उत्पादन को करीब 10 गुना बढ़ाकर लगभग 5 एमएमएससीएमडी करना है।
योजना के तहत सीबीजी संयंत्रों के लिए गैस की खरीद सुनिश्चित करने, मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और ऋण गारंटी समेत कई सुविधाओं को एकीकृत किया गया है। सरकार के अनुसार इससे निवेशकों और वित्तीय संस्थानों को लंबे समय के लिए अधिक निश्चितता मिलेगी।
छह प्रमुख उपायों को एक ढांचे में जोड़ा
गोबरधन योजना में सीबीजी खरीद की सुनिश्चितता, मूल्य निर्धारण, परियोजनाओं के लिए पूंजी सहायता, पाइपलाइन ढांचे का विकास, ऋण गारंटी और सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड को शामिल किया गया है।
योजना के तहत सीबीजी उत्पादकों के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू का निर्धारित मूल्य रखा गया है। पात्र नई परियोजनाओं को स्थापित सीबीजी क्षमता के प्रति टीपीडी पर अधिकतम दो करोड़ रुपये की पूंजी सहायता मिल सकेगी। सीबीजी क्लस्टर को मुख्य पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने के लिए पात्र पूंजीगत खर्च का 80 प्रतिशत तक और स्वतंत्र संयंत्रों को सिटी गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए 50 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है।
सीबीजी क्षेत्र की पात्र एमएसएमई परियोजनाओं के लिए ऋण गारंटी के तहत डिफॉल्ट की स्थिति में बकाया राशि के 85 प्रतिशत तक का कवरेज दिया जाएगा। सामान्य एमएसएमई परियोजनाओं के लिए गारंटी सीमा 20 करोड़ और महिला संचालित एमएसएमई परियोजनाओं के लिए 25 करोड़ रुपये होगी।
कचरे से ऊर्जा उत्पादन पर जोर
पुरी ने कहा कि फसल अवशेष, पशु अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों को सीबीजी में बदलकर स्वच्छ घरेलू ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे जैविक खाद का उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। किसान, सहकारी संस्थाएं, गौशालाएं और स्थानीय उद्यम इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने कहा कि भारत अपनी प्राकृतिक गैस की करीब आधी जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में घरेलू जैविक कचरे को गैस संसाधन में बदलना महत्वपूर्ण अवसर है।
कार्यक्रम में गोबरधन हैंडबुक का विमोचन और यूनिफाइड गोबरधन पोर्टल की शुरुआत भी की गई। पोर्टल का उद्देश्य आवेदन और योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को एक मंच पर लाना तथा पारदर्शिता बढ़ाना है।
अगस्त 2026 तक देश में 217 से अधिक सीबीजी संयंत्र शुरू हो चुके हैं, जिनकी स्थापित क्षमता 1,700 टीपीडी से अधिक है। सरकार के अनुसार योजना से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत, 75,000 करोड़ रुपये से अधिक जीडीपी में योगदान और 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। योजना के तहत 1 करोड़ टन जीवाश्म ईंधन को स्वच्छ गैस से बदलने और 4 करोड़ टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने का भी अनुमान है।